ताड़ासन दो शब्दों से मिलकर बना है— ‘ताड़’ जिसका अर्थ है ‘पर्वत’ या ‘ताड़ का पेड़’, और ‘आसन’ जिसका अर्थ है ‘मुद्रा’। जिस प्रकार ताड़ का पेड़ सीधा और मजबूत होता है, यह आसन भी आपके शरीर को वही मजबूती और सीधापन प्रदान करता है।
ताड़ासन क्यों करना चाहिए?
आजकल की जीवनशैली में हम अक्सर झुककर बैठते हैं या घंटों मोबाइल/लैपटॉप का उपयोग करते हैं, जिससे रीढ़ की हड्डी टेढ़ी होने लगती है। ताड़ासन शरीर के प्राकृतिक संतुलन को वापस लाने और मुद्रा (Posture) को सुधारने के लिए सबसे जरूरी आसन है।

ताड़ासन की विधि (Step-by-Step Step)
- खड़े होने की स्थिति: समतल जमीन पर सीधे खड़े हो जाएं और अपने दोनों पैरों के बीच थोड़ी दूरी रखें।
- हाथों की स्थिति: अपनी उंगलियों को आपस में फंसाएं और हथेलियों को ऊपर की तरफ करते हुए सिर के ऊपर ले जाएं।
- स्ट्रेचिंग: अब गहरी सांस लेते हुए अपने पूरे शरीर को ऊपर की ओर खींचें और एड़ियों को जमीन से ऊपर उठाएं।
- बैलेंस: अब अपने पंजों पर संतुलन बनाएं और कुछ सेकंड इसी स्थिति में रुकें।
- वापसी: सांस छोड़ते हुए धीरे-धीरे अपनी एड़ियों और हाथों को वापस सामान्य स्थिति में ले आएं।
ताड़ासन के लाभ (Benefits)
- कद बढ़ाने में सहायक: बच्चों और किशोरों के लिए यह लंबाई बढ़ाने में बहुत कारगर है।
- रीढ़ की मजबूती: यह रीढ़ की हड्डी को सीधा और लचीला बनाता है।
- एकाग्रता (Focus): शरीर का संतुलन बनाने से मानसिक शांति और एकाग्रता बढ़ती है।
- पाचन में सुधार: शरीर के खिंचाव से पेट के अंगों की मसाज होती है, जिससे पाचन तंत्र बेहतर होता है।
ताड़ासन से शरीर को ऊर्जा कैसे मिलती है?
जब आप ताड़ासन में पूरे शरीर को ऊपर की ओर खींचते हैं, तो फेफड़े पूरी तरह खुल जाते हैं, जिससे शरीर में ऑक्सीजन का प्रवाह बढ़ जाता है। यह रक्त संचार (Blood Circulation) को तेज करता है और शरीर की प्रत्येक कोशिका तक ऊर्जा पहुँचाता है, जिससे आलस्य दूर होता है और आप तरोताजा महसूस करते हैं।
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ताड़ासन और लंबाई का विज्ञान
१.रीढ़ की हड्डी का विस्तार (Spine Stretching):
ताड़ासन में जब हम पूरे शरीर को ऊपर की ओर खींचते हैं, तो रीढ़ की हड्डी के बीच मौजूद इंटरवेर्टेब्रल डिस्क (Intervertebral Discs) पर दबाव कम होता है। यह खिंचाव रीढ़ को सीधा और लचीला बनाता है, जिससे शरीर की प्राकृतिक लंबाई पूरी तरह से निखर कर आती है।
२.ग्रोथ हार्मोन का उत्तेजित होना (Stimulating Growth
Hormones): नियमित रूप से शरीर को स्ट्रेच करने और सही मुद्रा में रहने से शरीर की पिट्यूटरी ग्रंथि (Pituitary Gland) सक्रिय रहती है, जो ह्यूमन ग्रोथ हार्मोन (HGH) के स्राव में मदद करती है।
३.पोस्चर में सुधार (Posture Correction):
कई बार गलत तरीके से बैठने या झुककर चलने के कारण हमारी रीढ़ की हड्डी दब जाती है और हम अपनी वास्तविक लंबाई से छोटे दिखने लगते हैं। ताड़ासन इस झुकाव को ठीक कर शरीर को सही ‘अलाइनमेंट’ में लाता है।
४.मांसपेशियों का लचीलापन:
यह पैरों से लेकर हाथों तक की सभी प्रमुख मांसपेशियों को खींचता है, जिससे शरीर का ढांचा (Skeletal System) बेहतर तरीके से विकसित होता है।
लंबाई के लिए ताड़ासन करने का ‘स्पेशल तरीका’:
खाली पेट अभ्यास: इसे सुबह खाली पेट ही करें।
होल्ड करना: ऊपर खींचकर कम से कम 20-30 सेकंड तक रुकें।
पुनरावृत्ति: इसे एक बार में 5 से 10 बार दोहराएं।
ताड़ासन करते समय बरतें ये सावधानियां:
- सिरदर्द या चक्कर आना: यदि आपको गंभीर सिरदर्द रहता है या बार-बार चक्कर आते हैं, तो इस आसन को करने से बचें।
- लो ब्लड प्रेशर: कम रक्तचाप (Low Blood Pressure) की समस्या होने पर एड़ियां उठाकर संतुलन बनाने का प्रयास न करें, सीधे खड़े होकर ही अभ्यास करें।
- अनिद्रा (Insomnia): रात के समय इस आसन का अभ्यास करने से बचना चाहिए क्योंकि यह शरीर में ऊर्जा का संचार बढ़ाता है, जिससे नींद आने में कठिनाई हो सकती है।
- घुटनों या पैरों में चोट: अगर आपके घुटनों, टखनों (Ankles) या पैरों में कोई गंभीर चोट या दर्द है, तो बिना डॉक्टरी सलाह के यह आसन न करें।
- गर्भावस्था: गर्भवती महिलाओं को यह आसन किसी विशेषज्ञ की देखरेख में ही करना चाहिए और पैरों के बीच अधिक दूरी रखनी चाहिए।
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